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ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत की नई उड़ान, किस खिलाड़ी से है गोल्ड की सबसे बड़ी उम्मीद?

By Dekho Khabrein · Published 24 Jul 2026, 6:47 AM · Updated 24 Jul 2026, 6:47 AM

हर चार साल में आने वाला कॉमनवेल्थ गेम्स सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं होता, बल्कि करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों, सपनों और गर्व का मंच भी बन जाता है। इस बार स्कॉटलैंड के ऐतिहासिक शहर ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत एक नए जोश के साथ उतरा है।

हालांकि इस संस्करण में खेलों की संख्या पहले की तुलना में कम कर दी गई है। हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती और टेबल टेनिस जैसे कई ऐसे खेल इस बार कार्यक्रम में शामिल नहीं हैं, जिनमें भारत पारंपरिक रूप से बड़ी संख्या में पदक जीतता रहा है। इसका सीधा असर भारत की कुल पदक संख्या पर पड़ सकता है। 

फिर भी भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास कम नहीं हुआ है। एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, जूडो और पैरा स्पोर्ट्स में देश को कई बड़े पदकों की उम्मीद है।

भारत के लिए सबसे बड़े पदक दावेदार

🥇 नीरज चोपड़ा (भाला फेंक)

ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा एक बार फिर भारत के सबसे बड़े गोल्ड मेडल दावेदार माने जा रहे हैं। 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता नीरज इस बार भी इतिहास दोहराने के इरादे से मैदान में उतरेंगे। 


🥇 मीराबाई चानू (वेटलिफ्टिंग)

भारतीय वेटलिफ्टिंग की पहचान बन चुकी मीराबाई चानू का अनुभव और निरंतर प्रदर्शन उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है। भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें एक बार फिर उनके प्रदर्शन पर रहेंगी। 


🥊 लवलीना बोरगोहेन (बॉक्सिंग)

ओलंपिक पदक विजेता लवलीना से भारत को बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक की उम्मीद है। बड़े मंच पर उनका अनुभव भारतीय दल के लिए महत्वपूर्ण होगा। 


🥋 तुलिका मान (जूडो)

भारतीय जूडो की स्टार खिलाड़ी तुलिका मान इस बार पदक जीतने की प्रबल दावेदारों में शामिल हैं। उनके प्रदर्शन पर विशेषज्ञों की विशेष नजर रहेगी। 


🏃 मुरली श्रीशंकर (लॉन्ग जंप)

लॉन्ग जंप में भारत के शीर्ष एथलीट मुरली श्रीशंकर से भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। यदि वे अपनी लय में रहे तो भारत के खाते में एक और बड़ा पदक जुड़ सकता है। 


पैरा खिलाड़ियों से भी बड़ी उम्मीद

ग्लासगो 2026 में पैरा स्पोर्ट्स का अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। भारत के पैरा पावरलिफ्टिंग, पैरा एथलेटिक्स और पैरा स्विमिंग खिलाड़ी भी पदक जीतने की मजबूत स्थिति में हैं। 


भारत का गौरवशाली कॉमनवेल्थ इतिहास

भारत ने पहली बार 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया था।

आज भारत इस प्रतियोगिता के सबसे सफल देशों में गिना जाता है।

कुछ यादगार उपलब्धियां—

  • 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया।
  • 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 61 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया।
  • निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन और वेटलिफ्टिंग वर्षों तक भारत की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं। हालांकि इनमें से कई खेल इस बार शामिल नहीं हैं। 

इस बार भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती

ग्लासगो संस्करण में केवल 10 खेल रखे गए हैं। ऐसे में भारत के कई पारंपरिक पदक अवसर कम हो गए हैं।

फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय खिलाड़ी एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग और पैरा स्पोर्ट्स में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हैं, तो भारत सम्मानजनक पदक तालिका के साथ प्रतियोगिता समाप्त कर सकता है। 


भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह सिर्फ प्रतियोगिता नहीं

हर खिलाड़ी के पीछे वर्षों की मेहनत, परिवार का त्याग और करोड़ों भारतीयों की उम्मीदें होती हैं।

जब कोई भारतीय खिलाड़ी पोडियम पर तिरंगा लहराता है और राष्ट्रगान बजता है, तो वह पल सिर्फ खिलाड़ी का नहीं बल्कि पूरे देश का होता है।

ग्लासगो से भी देश को ऐसे ही कई सुनहरे पल मिलने की उम्मीद है।


निष्कर्ष

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के लिए आसान नहीं होंगे, लेकिन चुनौतियां ही नए इतिहास लिखती हैं। खेलों की संख्या कम होने के बावजूद भारतीय खिलाड़ी दुनिया को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तैयार हैं।

अब पूरे देश की नजरें ग्लासगो पर हैं—क्या भारत एक बार फिर पदकों की नई कहानी लिख पाएगा?