Thursday, 23 July 2026 | Uttarakhand News
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देवशयनी एकादशी 2026: 25 जुलाई को कब से कब तक है एकादशी तिथि? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा का समय और चातुर्मास का महत्व

By Ankit Uniyal · Published 23 Jul 2026, 10:41 AM · Updated 23 Jul 2026, 10:41 AM

25 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी देवशयनी एकादशी

सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। यह एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और यहीं से चातुर्मास का शुभारंभ होता है। इस अवधि में श्रद्धालु विशेष रूप से पूजा, जप, दान और सेवा के कार्य करते हैं। 


देवशयनी एकादशी 2026 कब है?

इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत शनिवार, 25 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। उदया तिथि के अनुसार इसी दिन व्रत एवं पूजा का विशेष महत्व रहेगा। 

एकादशी तिथि

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) प्रातः 09:12 बजे (कुछ पंचांगों में 09:14 बजे) 
  • एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026 (शनिवार) प्रातः 11:34 बजे (कुछ पंचांगों में 11:36 बजे) 

पारण (व्रत खोलने का समय)

  • 26 जुलाई 2026 (रविवार)
  • सुबह 05:39 बजे से 08:22 बजे तक 

देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते, जबकि पूजा-पाठ, व्रत, दान, सत्संग और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है। 


पूजा विधि

देवशयनी एकादशी के दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु का पूजन करें।

  • भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।
  • पीले पुष्प, पीले वस्त्र एवं पीले फल चढ़ाएं।
  • घी का दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम अथवा “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या पीली वस्तुओं का दान करें। 

क्या करें और क्या न करें

करें

  • भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • तुलसी पूजन एवं दान-पुण्य करें।
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • जरूरतमंदों की सहायता करें।

न करें

  • क्रोध, झूठ एवं विवाद से बचें।
  • तामसिक भोजन एवं नशे का सेवन न करें।
  • किसी का अपमान या निंदा न करें। 

आस्था का संदेश

देवशयनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा और भक्ति का संदेश देती है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।